फल क्षय (आल्टर्नेरिया जाति, ऐस्पर्जिलस जाति, बोट्रियोडिप्लोडिया जाति, कोलेटोट्राइकम जाति) - भण्डारण एवं परिवहन के दौरान फल क्षय लीची उत्पादकों के लिए गम्भीर समस्या बन चुका है।
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लीची : शैवाल किट्ट
Submitted by kiran yadav on Wed, 28/04/2010 - 22:51
यह बिहार में लीची का प्रमुख हानिकारक कीट है। इसके लार्वा अगस्त से फरवरी तक पत्तियों में सुरंग बनाते हैं। अन्त में क्षतिग्रस्त प्ररोह मर कर गिर जाता है।
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लीची में कार्यिकीय विकार
Submitted by kiran yadav on Sat, 24/04/2010 - 18:53
लीची अत्यधिक पर-परागित फसल है। अलग-अलग पुष्प स्वबंध्य होता है, परन्तु इसमें पराग होता है। पुष्प के परागण के लिए मधुमक्खी, मक्खी एवं बर्र जैसे कीटों कीआवश्यकता होती है।
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खाद एवं उर्वरक: लीची
Submitted by kiran yadav on Fri, 23/04/2010 - 22:36