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Hindi

गेहूँ की अधिकतम उपजें

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गेहूँ की अधिकतम उपजें सुनिष्चित करने के लिए महत्वपूर्ण बिन्दु:

  1. यथासमय बोआई।
  2. क्षेत्र-विशिष्ट संस्तुत प्रजातियों का प्रयोग।
  3. क्षेत्र-विशेष के आधार पर उर्वरक की संतुलित मात्रा का प्रयोग करना चाहिए।
  4. यथासमय सिंचाई।
  5. यदि पिछली फसल में जिंक सल्फेट का प्रयोग नहीं किया गया हो तो बोआई के समय पर इसका प्रयोग करना चाहिए।
  6. खरपतवारों एवं नाशकजीवों (कीटों एवं रोगों) का उचित प्रबंध।

 

 

 

दीमक: धान

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छाल खाने वाली सूंडियाँ : लीची

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छाल खाने वाली सूंडियाँ - रात्रि के दौरान सूंडियाँ (इल्लियाँ) वृक्ष की छाल खाती हैं। वे बेधन करके स्तम्भ (ट्रंक) या मुख्य तनों के भीतर पहुंच जाती हैं और छाल से होकर काश्ठ को खाती हैं। प्रभावित हिस्सा बड़े रेशमी जालों  से ढक जाता है। गंभीर कीट ग्रसन की स्थिति में पौधे मर सकते हैं।

एरियोफिड माइट :लीची

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हानिकारक कीट 


गेहूं:सिंचाई और उसका कार्यक्रम

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गेहूं: सिंचाई और उसका कार्यक्रम बनाना


    सिंचाई सही समय पर और पर्याप्त मात्रा में की जानी चाहिए। सिंचाई का संस्तुत समय नीचे दिया जा रहा है:

गेहूँ : महत्व


  •  महत्व

गेहूँ: फसल रूपरेखा, सामान्य विवरण

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मधुमक्खी पालन

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मधुमक्खी पालन


समेकित कृषि पद्धतियाँ : मुर्गी-सह-मत्स्य पालन

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समेकित कृषि पद्धतियाँ

मुर्गी-सह-मत्स्य पालन


तालाब का निर्माण : समेकित कृषि पद्धतियाँ

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समेकित कृषि पद्धतियाँ

तालाब का निर्माण