Submitted by deepalitewari on Tue, 08/12/2009 - 16:08
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जीवाणुज मटर अंगमारी
रोगकारी जीव - स्यूडोमोनास सिरिन्जी पी0वी0 पाइसाइलक्षण :
- यह रोग भूमि से ऊपर के पौधें के सभी भागों को प्रभावित करता है। संक्रमित बीज से उत्पन्न पौद मर सकती है। संक्रमित पर्णक छोटे, गोल, अंडाकार या अनियमित रक्ताभ भूरे रंग की चित्तियों से युक्त होते हैं और उनका केन्द्र पारभसक केन्द्र अधिक गहरे भूरे किनारे से युक्त होता है।
- कई चित्तियाँ मिलकर अंगमारी आकृति उत्पन्न करती हैं।
- तनों एवं पर्णवृंत्तों पर चाकलेटी भूरे रंग के रेखाकार धारियाँ प्रकट होती हैं।
- फलियाँ चाकलेटी भूरे रंग की, पतली, मुड़ी हुई एवं सिकुड़ी हुई हो जाती हैं।
- शुष्क जीवाणुज टपकन के कारण फलियों का पृष्ठ चमकदार हो जाता है।
- बीज विवर्णित एवं सिकुड़े हुए हो जाते हैं।
जीवाणुज अंगमारी नियंत्रण के उपाय :
- सदैव रोगरहित फसल से प्राप्त स्वस्थ बीजों या प्रमाणित बीजों की बोआई कीजिए।
- सदा विवर्णित एवं सिकुड़े हुए बीजों को निकाल दीजिए और बोआई से पहले बीजों को 1-2 घंटे तक स्ट्रेप्टोसाइक्लिन विलयन (10 लीटर जल में 1 ग्राम) में डुबोइए।
- रोग के पहले लक्षण प्रकट होते ही स्ट्रेप्टोसाइक्लिन (0.01%) का छिड़काव कीजिए और आवश्यकता महसूस होने पर 7 दिनों के बाद इसे दुहराइए।
- 3 वर्ष का फसल-चक्र अपनाइए।
- सफाई रखिए, समुचित जल निकास बनाए रखिए और पौधों के बीच समुचित दूरी रखिए।
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