पुष्प
लीची में तीन प्रकार के पुष्प पाए जाते हैं :
नर या पुंकेसरी पुष्प
इन पुष्पों में स्त्रीकेसर का अभाव होता है। परवर्ती संरचना (स्त्रीकेसर) द्वारा घेरी गई दशा में गुलाबी रोमिल प्रोद्वर्ध होता है जो वर्तिकाग्र एवं वर्तिका दोनों से रहित स्त्रीकेसर का अधिक अल्पविकसित या अवर्धित रूप होता है। तंतु लम्बाई में भिन्न होता है।
मादा या मादा के रूप में कार्य करने वाला उभयलिंगी पुष्प
पुष्प सुविकसित अंडाशय एवं वर्तिकाग्र रखने वाला कार्यात्मक दृष्टि से उभयलिंगी होता है। अंडाशय में इसकी वर्तिकाग्री पालियों से युक्त 2-4 अंडप होते हैं। पुष्प में छोटे तंतुओं से युक्त पुंकेसर पाए जाते हैं।
नर के रूप में कार्य करने वाला उभयलिंगी पुष्प
पुंकेसर एवं स्त्रीकेसर उपस्थित होते हैं परन्तु पराग का प्रवेश होने देने के लिए वर्तिकाग्र की पालियां खुली नहीं होती हैं। तंतु लम्बाई में भिन्न होते हैं। पुंकेसर लम्बाई के दो सेटों में होते हैं। परन्तु केवल लम्बे तंतुओं से युक्त पुंकेसर निषेच्य (अबंध्य) होते हैं। स्त्रीकेसर में छोटी अविभाजित वर्तिका, शुष्क वर्तिकाग्री शाखाएं होती हैं और यह अकार्यात्मक होता है।
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