उफ्रा अथवा तना नेमाटोड (Ufra or Stem Nematode)
कारक: डाइटीलेन्चस ऐंगस्टस (Ditylanchus angustus)
विवरण: नम वातावरण में छोटे-छोटे पौधों पर इस नेमाटोड का आक्रमण होता है । नेमाटोड पौधों के ऊपर चढ़ जाते हैं और अग्रभाग के कोमल ऊतक (Tissue) में अपनी शूकिका प्रविष्ट कर भोजन प्राप्त करते हैं । जैसे-जैसे पौधा बढ़ता है, नेमाटोड भी ऊपर जाता रहता है । इनकी अधिक संख्या पर्णच्छद और इससे ढकी कोमल पत्तियों के बीच में होती है । जब फसल- पकती है तो ये सिकुड़कर गोल हो जाते हैं तथा सुषुतावस्था में चले जाते हैं ।
लक्षण:
रोग के स्पष्ट लक्षण बालियों पर दिखाई देते हैं,परन्तु कृत्रिम निषेचन द्वारा पौधों की पत्तियाँ हरितमाहीन होकर बाद में सूख जाती हैं । कभी-कभी सारी पत्तियां सिकुड़कर कुरूप हो जाती हैं । बालियां भी विकृत हो जाती हैं और उनमें दाने नहीं पड़ते या कभी -कभी उग्र रूप में बालियां पूर्णरूप से बाहर ही नहीं निकल पाती ।
नियंत्रण:
- फसल के डंठलों को जला दें एवं धान की पेडी-फसल न लें, इससे निवेश द्रव्य कम हो जायगा ।
- गर्मी में खेत की गहरी जुताई करें ।
- जुट अथवा तिल (Sesamum) को धान के साथ फसल चक्र में लगाए ।
- कार्बोफ्यूरान का प्रयोग करें ।
- रोपाई देर से करे तथा कम अवधि की किस्में चुनें ।
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