Submitted by Vinod Kumar on Tue, 11/12/2012 - 10:35
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किसानों का सारथी एग्रोपीडिया
कानपुर, नगर प्रतिनिधि : एग्रोपीडिया कृषि के क्षेत्र में किसानों का सारथी बना है। भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (आईआईटी) के वैज्ञानिकों ने इसका प्लेटफार्म तैयार किया है, जिसमें सोशल नेटवर्किग के जरिए किसान सफल खेती के गुरुमंत्र हासिल कर रहे हैं। भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (आईसीएआर) के तत्वावधान में कृषि विश्वविद्यालयों की मेधा अपने अनुभवों से आनलाइन कंप्यूटरीकृत ग्रंथ को लबालब भरने में जुटी है। एग्रोपीडिया न केवल कृषि से संबंधित आधुनिक ज्ञान देने का काम कर रहा है बल्कि परंपरागत खेती के तरीकों को संरक्षण भी दे रहा है। प्रोजेक्ट प्रमुख आईआईटी के प्रो. टीवी प्रभाकर ने बताया कि एग्रोपीडिया में सोशल नेटवर्किग के जरिए परंपरागत खेती के तरीके भी संजो कर रख रहे हैं। संस्थान के कंप्यूटर साइंस विभाग के 9 इंजीनियर इससे जुड़े हैं तो कृषि के चार वैज्ञानिक भी इसमें बराबर योगदान देते हैं। जीबी पंत कृषि विश्वविद्यालय, पंतनगर, यूनीवर्सिटी ऑफ एग्रीकल्चर धारवाड़, कर्नाटक, इक्रीसेट हैदराबाद भी इसमें अपना सहयोग देता है। एग्रोपीडिया से विश्व के 50 हजार पंजीकृत उपभोक्ता जुड़ चुके हैं तो इंटरनेट पर प्रतिदिन औसतन 700 लोग इस आनलाइन कंप्यूटरीकृत ग्रंथ का उपयोग कर लाभ ले रहे हैं। आईआईटी से 15 लोगों की टीम कृषि संबंधी समस्या का समाधान कर रही है। कृषि विश्वविद्यालय से जुड़े विद्यार्थी, शोधार्थी एवं शिक्षक इसका उपयोग आधुनिक ज्ञान के भंडार के रूप में कर रहे हैं।http://in.jagran.yahoo.com/epaper/index.php?location=30&edition=2012-12-11&pageno=2#id=111756926572536280_30_2012-12-11
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