गेहूँ की पछेती खेती से अधिक उपज लीजिए
राजीव कुमार
गो0ब0पन्त कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय, पन्तनगर,
किसानों की फसल पध्दति में कुछ ऐसी परिस्थितियां है, जिनकी वजह से गेहूँ देर से बोना पडता है ऐसी परिस्थितियां तब आती है, जब किसान गेहूँ को, रबी की फसलों, जैसे तोरिया, आलू, सब्जी वाली फसलें या दीर्घकालीन खरीफ की फसलें, धान, पेडी या कपास के बाद उगाता है।
देर से बोने पर जमाव के समय कम तापमान तथा दाने बनते समय अधिक तापमान होने से फसल की बढवार पर काफी प्रभाव पडता है तथा फसल को अपना जीवन-चक्र कम समय में पूरा करना पडता है, जिससे पैदावार में कमी आती है। बोआई में विलम्ब करने से 3-4 क्ंविटल/है0 प्रति सप्ताह की दर से पैदावार कम होती है। फिर भी, नई सस्य पध्दतियों के द्वारा देर से बोने पर उपज में सुधार किया जा सकता है।
खेत की तैयारी
खरीफ की फसल को काटने से एक सप्ताह पहले खेत में सिंचाई कर देनी चाहिए। इस सिंचाई से खेत को तैयार करने में समय की बचत होती है। खरीफ की फसल की कटाई के बाद एक गहरी जुताई मिटटी पलटने वाले हल से तथा 2-3 हल्की जुताई हैरो से करें।
उन्नत किस्में
गेहूँ की अधिक उपज लेने के लिए रोगरोधी उन्नत किस्मों का ही प्रयोग करें।
सारणी-1: उत्तर प्रदेश के लिए संस्तुत उन्नत किस्में
क्षेत्र
किस्में
पश्चिमी उ0प्र0
एच0डी0-2285, पी0बी0डब्ल्यू0 226, यू0पी0 2338, राज 3077, एच0यू0डब्ल्यू 234, राज 3765, पी0बी0डब्ल्यू0 373
पूर्वी उ0प्र0
ए0पी01209, एच0यू0डब्ल्यू 234, के 8020, एच0पी0 1633, एच0डी0 2285, एच0डी0 2643 (आई)
बुन्देलखण्ड
स्वाति, जे 405, लोक 1, जी0डब्ल्यू 173
पर्वतीय क्षेत्र
यू0पी0 1109, बी0एल0 404, एच0एस0 207 एवं एच0एस0 295
लवण से प्रभावित क्षेत्र
के0आर0एल0 1-4, राज 3077, पीबी0डब्ल्यू 65
बीज दर एवं दूरी
देर से बोई गई फसल में कल्ले निकलने एवं वृध्दि के लिए कम समय मिलता है, इसलिए अधिक बीजों की आवश्यकता होती है। 125 कि0ग्रा0 बीज प्रति है0 पर्याप्त रहता है। कतार से कतार की दूरी 15-18 से0मी0 तथा गहराई 5 से0मी0 रखनी चाहिए। बीज को पानी में 12 घंटे भिगोने के बाद बोना, जमाव की दृष्टि से अच्छा रहता है। बोआई के बाद अच्छी तरह सडी हुई गसबर की खाद की एक हल्की तह बिछाने से जमाव अच्छा व जल्दी होता है। स्ट्रा मल्च के द्वारा भी जमाव में सहायता मिलती है। 25 दिसम्बर के बाद बोआई करने पर अच्छा आर्थिक लाभ नही मिलता है।
सिंचाइ
सिंचाइयों की संख्या, मृदा के प्रकार, शरछ ऋतु की वर्षा, मृदा जल तथा प्रत्येक सिंचाई पर दिये जाने वाले पानी के अनुसार कम या अधिक हो सकती है। विलम्ब से बोआई की स्थिति में तापमान कम होने से शिखर जड (सी0आर0आई0) देर से आने पर पहली सिंचाई 25-30 दिन में करें। जनवरी में बोने पर 15 दिन के अन्तराल पर सिंचाई करने पर अच्छे परिणाम मिले है। यदि एक सिंचाई उपलब्ध है, तो यह सिंचाई काउन रूट इनीसियेशन (सी0आर0आई0) पर देनी चाहिए। दो सिंचाई उपलब्ध होने की स्थिति में, पहली काउन रूट इनीसियेशन पर तथा दूसरी बूट अवस्था (बाली निकलने के पहले) तथा तीन सिंचाई उपलब्ध होने पर पहली काउन रूट इनीसियेशन पर, दूसरी बूट पर तथा तीसरी दुग्ध अवस्था पर करनी चाहिए। चार सिंचाइयों की उपलब्धता की स्थिति में, पहली काउन रूट इनीसियेशन पर दूसरी लेट टिलरिंग, तीसरी बूट अवस्था तथा चौथी दुग्धावस्था पर सिंचाई करनी चाहिए। यदि पांच है, तो पहली सी0आर0आई0, दूसरी लेट टिलरिंग, तीसरी लेट ज्वोइटिंग, चौथी फूल पर, पांचवी दुग्धावस्था पर करनी चाहिए। और सिंचाई उपलब्ध होने पर छठी सिंचाई दाना हल्का कठोर की अवस्था में करें। हल्की मिटटी एवं शुष्क वातावरण् में अधिक सिंचाइयों की आवश्यकता पडती है। दुग्धावस्था पर सिंचाई करते समय यह ध्यान रखना चाहिए कि हवा तेज न चल रही हो, अन्यथा फसल गिर जायेगी तथा पैदावार में कमी हो जायेगी।
उर्वरक
उर्वरको की मात्रा मृदा जांच कराने के बाद निर्धारित करें। जांच के अभाव में एक हैक्टर में 80 किलोग्राम नाइट्रोजन, 30 किलोग्राम फास्फोरस एवं 30 किलोग्राम पोटाश की मात्रा दें (फास्फोरस एवं पोटाश को कमी की दशा में ही दें)। फास्फोरस एवं पोटाश की पूरी मात्रा तथा नाइट्रोजन की आधी मात्रा बोते समय बीज से 5 से0मी0 गहराई पर एवं बगल में दें। शेष नाइट्रोजन की मात्रा 24 घंण्टे पूर्व पहली सिंचाई पर डालें।
खरपतवारों की रोकथाम
बोआई के 4-5 सप्ताह बाद एक निराई-गुडाई करने से खरपतवार नष्ट किये जा सकते है। चौडी पत्ती वाले खरपतवारों को नष्ट करने के लिए 2,4-डी की आधा कि0ग्रा0 सक्रिय अवयव मात्रा को 700-800 लीटर पानी में घोलकर 45-50 दिन में छिडकाव करें। घास कुल के खरपतवारों को नष्ट करने के लिए आइसोप्रोटोरोन के तीन चौथाई कि0ग्रा0 सक्रिय अवयव को 30-35 दिन में 700-800 लीटर पानी में घोलकर छिडकें या पैन्डीमिथीलीन की एक कि0ग्रा0 सक्रिय अवयव मात्रा का बोआई के बाद 2-3 दिन में 700-800 लीटर पानी में मिलाकर छिडकाव करें या फ्लूरोक्सी पामर (स्ट्रेने) के 100 ग्राम सक्रिय अवयव एवं आइसोप्रोटोरोन के आधा कि0ग्रा0 सक्रिय अवयव के मिश्रण को 700-800 लीटर पानी में घोलकर 30-35 दिन में छिडकाव करें या आइसोगार्ड, जो आइसोप्रोटोरोन एवं 2,4-डी का मिश्रण है (आइसोप्रोटोरोन आधा कि0ग्रा0 सक्रिय अवयव तथा 125 ग्राम 2,4-डी सक्रिय अवयव), को 1250 ग्राम/है0 के हिसाब से 700-800 लीटर पानी में घोलकर छिडकाव करें।
इस लेख का संकलन प्रियंका शुक्ला द्वारा किया गया है।
- Login to post comments
- 13592 reads
