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जीवाणुज़ पत्ती रेखा (Bacterial Leaf Streak)

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जीवाणुज़ पत्ती रेखा (Bacterial Leaf Streak)

कारक: जैन्थोमोनास ओराइज़ी पीवी. ओराइज़िकोला (Xanthomonas oryzae pv.oryzicola) 

विवरण:प्रथम संक्रमण रोग-ग्रस्त बीज द्वारा तथा द्वितीयक संक्रमण वर्षा की बूंदों, सिंचाई के पानी और स्वस्थ एवं रोग ग्रस्त पत्तियाँ तथा जीवाणु के आपसी सम्पर्क से होता हैं । स्वस्थ पत्ती में जीवाणु केवल रंध्रों अथवा घाव के रास्ते प्रविष्ट होते हैं और मृदूतक में अंतराकोशिका स्थान (Intercellular Space) में बढकर हरित लवक (Chloroplast) को नष्ट करके उसे जलसिक्त बना देते हैं । यदि कुछ दिन वर्षा न हो, तब रोग का फैलाव रूक जाता है । लक्षणस्थल के फैलाव हेतु २६ से ३० डिग्री से. तापमान अनुकूलतम है, साथ ही भूमि में नाइट्रोजन की अधिकता तथा पौधों की अधिक सघनता भी रोग बढ़ाने में सहायक है ।

लक्षण:
इसके लक्षण पत्तियों के अंतराशिरा (Interveinal) भाग में सूचीशीर्ष (Pinhead) के समान सूक्ष्म पानी भीगा पर भासक (Transparent) स्थान स्पष्ट होता है । ये धारियां शिराओं से घिरी रहती हैं और पीली या नारंगी कत्थई रंग की हो जाती हैं । मोती की तरह छोटे-छोटे पीले से गंदे सफेद रंग के जीवाणुज़ पदार्थ धारियों पर पाए जाते हैं, जो पत्तियों की दोनों सतहों पर होते हैं । कई धरियां आपस में मिलकर बड़े धब्बों का रूप ले लेती हैं, जिससे पत्तियाँ समय से पूर्व सूख जाती हैं । पर्णच्छद भी संक्रमित होता है, जिस पर पत्तियों के समान ही लक्षण प्रकट होते हैं ।

 

नियंत्रण:

  • बीज प्रमाणित स्रोत से लिया जाय । 
  • क्षेत्र के अनुसार रोग रोधी किस्मों का चुनाव करें ।
  • बीज को २.५ ग्राम स्ट्रेप्टोसाइक्लिन या ३ ग्राम एग्रीमाइसीन-१०० का १० लीटर पानी के घोल में १२ घन्टे भिगोएं या ५० से. गर्म पानी में ३० मिनट रखकर उपचारित करें ।
  • रोग लक्षण प्रकट होने पर १२ ग्राम स्ट्रेप्टोसाइक्लिन या ७५ ग्रा. एग्रीमाइसीन १०० प्रति हैक्टर की दर से छिड़काव करें । आवश्यक हो तो १० से १२ दिन बाद दूसरा छिड़काव करें ।

 

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