धान गाल मिज (पिटिका शलकाम) :
इसका वयस्क कीट लम्बी टांगों से युक्त मक्खी समान छोटे मच्छर-सा होता है। मादा चमकीला लाल उदर रखती है और नर काले रंग का होता है। अण्डे पर्ण फलक या पर्णच्छद पर दिए जाते है। इस कीट का आक्रमण नर्सरी में प्रारंभ होता है और फसल की जोदी निकलने की अवस्था तक जारी रहता है। मैगट तने मे प्रवेश करते हैं और केन्द्रीय प्ररोह के शीर्षस्थ बिन्दु तक पहुँचते हैं जहॉ यह खाकर विकसित होते हैं। आक्रमण की गई दोजी की केन्द्रीय पत्ती ''रजत (सिल्वर) प्ररोह'' नामक चमकती हुई नालिकाकर संरचना में परिवर्तित हो जाती है। प्रभावित दोर्जी में पुष्पगुच्छ उत्पन्न नहीं होते हैं। फसल की प्रारंभिक अवस्थाओं में कीट ग्रहसन होन पर प्रचुर दोर्जियां उत्पन्न होती है और पौधो की वृध्दि अवस्ध्द हो जाती है। कीटग्रस्त दोर्जी के आधार पर प्यूपीकरण होता है। ई0 टी0 एल 5 प्रतिशत रजत प्ररोह है।
प्रबन्ध :
- जुलाई में अगेती रोपाई से गाल मिज क्षति घट जाती है।
- रजत प्ररोहों को एकत्र करके नष्ट कर दीजिए।
- नाइट्रोजन के अधिक प्रयोग से बचिए।
- खरपतवारों को निकाल दीजिए।
- परजीव्याम प्लैटीगैस्टर ओराइजी इस हानिकारक कीट के विरूध्द अधिक प्रभावी है।
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