Submitted by kiran yadav on Tue, 18/05/2010 - 22:50
Posted in
नर्सरी में पोशक प्रबन्ध
विभिन्न पोशक कर्मियों एवं पौधों की खराब वृध्दि के कारण जैविक पध्दति के अंतर्गत खराब नर्सरी प्रमुख समस्या होती है। पौधों की अनुकूलतम वृध्दि रखने के लिए निम्ननलिखित पोशक प्रबन्धन की प्रक्रियाओं का अनुसरण करना चाहिए।
- नर्सरी उगाने के लिए 25 कि0 ग्रा0 गोबर की खाद 1 कि0ग्रा0 रांक फास्फेट एवं 100 ग्राम जिंक सल्फेट/10 वर्ग मीटर के प्रयोग की संस्तुति की गई है। इसके अतिरिक्त यदि नर्सरी में जस्ते की कमी दिखाई दे तो बोआई के 10 एवं 20 दिनों के बाद जल में जिंक सल्फेट (0-5%) + चूना (0-25%) के दो छिड़कावों की संस्तुति की गई है।
- अप्रैल के पहले सप्ताह तक क्रोटालेरिया जंषिया (सनई) की बोआई की जाएगी। जैसे ही एवं जब अवष्कता हो सिंचाई करके 45 दिनों तक क्रोटालेरिया उगने दीजिए। इसे षुश्क मृदा में मिला दीजिए और इसके बाद जल का प्रयोग कीजिए। 12-15 दिनों के बाद नर्सरी के लिए खेती तैयार किजिए। क्रोटालेरिया मिलाने के समय पर 1 कि0 ग्रा0 रांक फॉस्फेट/वर्गमीटर की दर से प्रयोग कीजिए। नर्सरी उगाने के समय जिंक सल्फेटर 100 ग्राम /वर्गमीटर का प्रयोग कीजिए। इसके अतिरिक्त यदि नर्सरी में जस्ते की कमी दिखाई दे तो बोआई के 10 एवं 20 दिनों के बाद जल में जिंक सल्फेट (0.5%) चूना (0.25%) के दो छिड़कावों की संस्तुति की गई है।
- Login to post comments
- 1317 reads
