Submitted by kanchannainwal1 on Tue, 19/01/2010 - 10:58
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पत्ती
पर्णच्छद वृंत को पूरी तरह से ढके रखता है जो कम से कम एक पूरी पोरी तक फैला होता है
- गन्ने के पौधे की पत्ती दो हिस्सों में विभाजित होती है:
(क) पर्णच्छद, (ख) फलकसंधि द्वारा पृथक्कृत फलक
- समान्यत: पत्तियाँ गाँठों के साथ बारी-बारी से संलग्न होती है और इस प्रकार सम्मुख पार्श्वों पर दो पंक्तियाँ बनाती हैं।
- पूर्ण विकसित (परिपक्व) गन्ने का पौधा औसतन लगभग 0.5 वर्गमीटर ऊपरी पर्ण पृष्ठ रखता है हरी पत्तियों की संख्या प्रति वृंत लगभग दस होती है जो प्रजाति एवं वर्धन दशाओं पर निर्भर करता है।
- पर्ण फलक से होकर पत्ती का अनुप्रस्थ काट तीन प्रमुख ऊतक प्रदर्शित करती है: (1) बाह्य त्वचा, (2) पर्णमध्योतक और (3)शिराएं या वाहिनी बंडल।
- वहाँ फलक संधि होती है जहाँ ''गलकंबल'' (डयूलैप) नामक फानाकार क्षेत्र पाए जाते हैं।
- पर्णच्छद संरचना (बनावट) एवं कार्य में पर्ण फलक के समान होता है।
- जीभिका (लिग्यूल) पर्णच्छद के भीतर झिल्लीदार उपांग होता है जो पर्ण फलक से पर्णच्छद (आच्छद) को अलग करती है। पालि (ऑरिकल) पर्णच्छद किनाए के ऊपर भाग पर स्थित कान के समान (कर्णरूपी) उपांग होते हैं।
- पर्ण रोम छोटे रोमों से युक्त पत्ती के विभिन्न हिस्सों का आवरण होता हैं
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