Submitted by kanchannainwal1 on Sat, 23/01/2010 - 11:56
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बीज की तैयारी और उपचार
- बोआई से पूर्व कलिकाओं को किसी संभव क्षति से बचाने के लिए गन्ने के वृंतों से सूखी पत्तियाँ हाथ से उतारनी चाहिए।
- इसके बाद गन्ने को सामान्यत: 30 से 40 से.मी. लंबी तीन कलिकाओं से युक्त पोरी खंडों (सेटों) में काट लेना चाहिए।
ताप चिकित्सा से बीज गन्ना उपचार
- अंकुरण और दोजियाँ निकलने को प्रभावित करने वाली जलवायु दशाओं के आधार पर बीज दर लगभग 25,000 से 45,000 तीन कलिकायुक्त सेट प्रति हैक्टेयर तक होती है। उपोष्ण कटिबंधीय क्षेत्र में दरें ऊँची (35 - 45 हजार) और तमिलनाडु में सबसे अधिक (55,000) होती है। एक हैक्टेयर भूमि क्षेत्र की रोपाई/बोआई करने के लिए औसतन 36,000 तीन कलिकायुक्त सेट (बीजखंड) या 60 क्विंटल बीज गन्ना पर्याप्त होते है।
- बीज सेटों (खंडों) को कवक रोगों द्वारा आक्रमण होने से बचाने के लिए और अंकरण में सुधार लाने के लिए बोआई से पहले 10 मिनट तक ऐगालोल (3%) के 0.5 प्रतिशत विलयन या ऐरेटान (6%) या टैफासान (6%) के 0.25 प्रतिशत विलियन में डुबोया जाता है। बोआई से पूर्व बीज को 10 मिनट तक कार्बेन्डाजिम के 0.1% विलयन से भी उपचारित किया जाता है। उत्तारी भारत में ऐरेटान का प्रयोग करने की संस्तुति की गई है। ऐरेटान अंकुरण में सुधार करता है और कवक आक्रमण से बचाता है ।
- गर्म जल उपचार इकाई में 500 से. पर 2 - 2.5 घंटे तक बीज गन्ना को उपचारित किया जाता है।
- आई आई एस आर्द्र गर्म वायु उपचार इकाई में बीज गन्नों के 540 से. पर 4 घंटे तक उपचारित करना चाहिए। बीजोढ़ रोगजनकों को नियंत्रित करने का यह सर्वाधिक प्रभावशाली विधि है।
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