तराई क्षेत्र के लिए उपयुक्त प्रजातियां
काला नमक, हंसराज, वासमती सफेद बिन्दुली, तिलका चन्दन, तपोवन बासमती।
बीजों का चयन
1. बीज ऐसी समुचित प्रजाति का होना चाहिए, जो उगाने के लिए प्रस्तावित है।
2. बीज स्वच्छ और अच्छ बीजों के स्पष्ट मिश्रणों से युक्त होना चाहिए।
3. बीज परिपक्व सुविकसित और मोटा होना चाहिए।
4. बीज आयु या खराब भंडारण के स्पष्ट चिन्ह्नों से मुक्त होना चाहिए।
5. बीज को उच्च अंकुरण क्षमता रखनी चाहिए।
धान की पौध (नर्सरी) तैयार करने के लिए बीजों को 12 घंटों तक जल में भिगोना चाहिए और उसके बाद जल निथार लेना चाहिए। इसके बाद बीज में स्यूडोमोनास फ्लुओरेसेन्स एंव ट्राइकोडर्मा (10 ग्राम /किग्रा बीज की दर से) मिश्रित किया जाता है और अगले 24-48 घंटे तक देर में भंडारित किया जाता है। पंकिल जुताई की गई बीज क्यारी में पूर्ण-अंकुरित बीजों के प्रकीर्णित किया जाता है। जब जल की कमी होती है। तो बीजो को सुविधाजनक लम्बाई एवं 1.5 मी0 चौ0 की 15 सेमी0 ऊँची क्यारियों में बोया जा सकता है। एक हैक्टेयर क्षेत्रफल की रोपाई करने के लिए 500-1000 वर्ग मीटर के सभी कट नर्सरी क्षेत्र की आवश्यकता होती है।
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