मक्का मे खाद एवं उर्वरक
अमित भटनागरगो0ब0पन्त कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय, पन्तनगर,
अधिकतम लाभ के लिए बुवाई से पहले मिट्टी की जॉच करवाना आवश्यक है। बुवाई से पूर्व खेत में भली भॉति सडी हुई 10-15 टन प्रति है0 की दर से गोबर की खाद मिला देनी चाहिए। मक्का की संकर एवं संकुल किस्मों द्वारा अधिकतम उपज लेने के लिए खाद एवं उर्वरक की पर्याप्त मात्रा उपयुक्त समय पर ही देनी चाहिए। मक्का की फसल में खाद एवं उर्वरक की मात्रा प्रजातियों के अनुसार निम्न प्रकार देनी चाहिए ।
प्रजाति
नत्रजन
फास्फोरस
पोटाश
कि0ग्रा0/है0
कि0ग्रा0/नाली* (0.2 है)
कि0ग्रा0/है0
कि0ग्रा0/नाली*
कि0ग्रा0/है0
कि0ग्रा0/नाली
संकर प्रजाति
100-120
2.0-2.4
60
1.2
40
0.8
स्वीटकार्न
100-120
2.0-2.4
60
1.2
40
0.8
बेवीकार्न
150
3.0
60
1.2
40
0.8
पॉपकार्न
80-100
1.6-2.0
60
1.2
40
0.8
बुवाई के समय सम्पूर्ण फास्फोरस एवं पोटाश की मात्रा एवं नत्रजन की आधी मात्रा कूंडों में प्रयोग करनी चाहिए। शेष नत्रजन की आधी मात्रा बराबर-बराबर मात्रा में दो बार पहली बुवाई से 30-35 दिन बाद तथा दूसरी मात्रा नर मंजरी (टैसलिंग) निकलते समय टाप डे्रसिंग के रूप में देनी चाहिए। बेवीकार्न मक्का हेतु आधी नत्रजन बोते समय तथा आधी मात्रा बुवाई के 25-30 दिन बाद फसल में डाले। खाद एवं उर्वरक की मात्रा प्रजाति के पकने की अवधि पर भी निर्भर करती है। जल्दी पकने वाली प्रजातियों को 60-80 कि0ग्रा0 नत्रजन, 60 कि0ग्रा0 फास्फोरस तथा 40 कि0ग्रा0 पोटाश की आवश्यकता होती है मध्यम व देर स पकने वाली प्रजातियों को 100-120 कि0ग्रा0 नत्रजन की आवश्यकता होती है जबकि फास्फोरस एवं पोटाश की मात्रा वहीं रहती है। यदि खेत में जिंक की कमी हो तो 20 कि0ग्रा0 जिंक सल्फेट प्रति हैक्टर की दर से अन्तिम जुताई के समय छिडकना चाहिए। इस बात का ध्यान रखें जिंक सल्फेट को फास्फैटिक उर्वरकों के साथ न मिलायें।
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