मक्का
मक्का, धान एवं गेहू के बाद तीसरी मुख्य खाद्यान्न फसल है, इसे पोपकोर्न, sweetcorn ग्रीनकोर्न एवं बेबीकोर्न के रूप में पहचान मिल चुकी है. इसके अतिरिक्त इसे खाद्य तेल, रातिब, शराब आदि में भी उपयोग में लाया जा रहा है. मक्का को अनाज, दाना एवं चारे के रूप में सदियों से प्रयोग में लाया जा रहा है.
प्रजातियों का चुनाव
मक्का की प्रजातियों को पकने के आधार पर तीन मुख्य भागो में बांटा गया है.
१. अगेती या शीघ्र पकने वाली प्रजातियाँ (७५-८० दिन अवधि): ये प्रजातियाँ बाढ़ ग्रस्त एवं असिंचित क्षेत्रों के लिए उपयुक्त है . इन्हें जायद ऋतू में भी उगाया जा सकता है . ये प्रजातियाँ अन्तः फसल के लिए उपयुक्त होती है:
संकुल - कंचन, गौरव, सूर्य संकर - पन्त संकर मक्का-१ देशी प्रजातियाँ - फर्रुखाबाद लोकल, मेरठ सफ़ेद, जौनपुर पीली, बुलंदशहर लोकल, असिंचित दशा में - दियारा -३, डी -765.
2. मध्यम अवधि वाली प्रजातियाँ (८० -९० दिन अवधि)- यह प्रजातियाँ उन क्षेत्रों के लिए उपयुक्त है जहा वर्षा सामान्य होती है : संकुल: तरुण, नवीन, किरण, नवजोत संकर: पूसा अर्ली हाइब्रिड- १,२, प्रकाश, जे.के. एम्. एच. १७०१ ३.
3. देर से पकने वाली प्रजातियाँ (९०-१०० दिन अवधि) संकुल: देवकी, प्रभात, किसान, विजय संकर: गागा सफ़ेद-२, गंगा-५, सरताज, त्रिशुलता, शक्तिमान-२, पोलो आदि
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