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मूल नेमाटोड (Root Nematode)

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मूल नेमाटोड (Root Nematode)

कारक: हर्शमैनिएला ओराइज़ी (Hirschmannielle oryzae) 

विवरण: नेमाटोड धान की जड़ों में प्रसुप्तावस्था में जीवित रहता है और एक मौसम से दूसरे मौसम की फसल को संक्रमित करता है । नम मिट्टी में इसके अण्डे दूसरे मौसम तक जीवित रहते हैं । नेमाटोड धान के अतिरिक्त मोथा एवं घास कुल के खरपतवारों की जड़ों पर भी प्रगुणित होता है ।

लक्षण:
पौधों पर इस व्याधि के स्पष्ट लक्षण प्रायः नहीं दिखाई देते, केवल पौधों की बढ़वार कम हो जाती है । नेमाटोड जड़ को बेधकर मृदूतक ऊतक से पोषण ग्रहण करता है, एवं उसमें प्रगुणित होता है । जड़ की छाल के रंग को सफेद से पीला भूरा और बाद में काले रंग में बदल देता है । रोग ग्रस्त जड़ों पर अन्य कवक एवं जीवाणुओं का प्रकोप बढ़ जाता है, जिससे जड़े सड़ जाती हैं । इस रोग के कारण ५० से ६० प्रतिशत दौजियों में कमी पाई गई है ।

 

नियंत्रण:

  • पौदशाला में ३ ग्राम फ्यूराडान ३ जी. प्रतिवर्ग मीटर प्रयोग करें । इससे नेमाटोड पौधों की जड़ों में नही घुस पाएगें । 
  • नीम की खली १०० से १२० कि.ग्रा. /हैक्टर प्रयोग करें ।
  • ढैंचा अंतरा-फसल रूप में उगाएं और आलू तथा मूंगफली को धान के साथ फसल-चक्र में सम्मलित करें । 
  • एक खेत के पानी से दूसरे खेत की सिंचाई न करें ।
  • गर्मी के मौसम में खेत की गहरी जुताई करें ।
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