Submitted by Amrendra on Tue, 08/09/2009 - 13:48
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लांस सूत्रकृमि रोग
वैज्ञानिक नाम:होप्लोलैमुस स्पेसीज(Hoplolaimus sp.)
विवरण
- लांस सूत्रकृमि बाह्य परजीवी तथा कभी-कभी अर्द्ध अंतःपरजीवी होते हैं l
- यह सूत्रकृमि उच्च तापमान और सूखी भूमि की स्थिति के लिए प्रतिरोधी होते हैं l
- इस सूत्रकृमि का लार्वा, वयस्क सूत्रकृमि के समान होता हैं लेकिन लम्बाई में ये छोटे होते हैं l
- इस समूह के सूत्रकृमि मिट्टी का नमूना लेते समय आसानी से पता चल जाते हैं l
लक्षण
- लांस सूत्रकृमि अपना भोजन जडों बाहरी की पर सतह लेते हैं लेकिन ये कभी-कभी अपने शरीर को थोडा सा जड़ में भेद कर भोजन लेते हैं l
- लांस सूत्रकृमि द्वारा क्षतिग्रस्त जडों का विकास प्रतिबंधित हो जाता हैं तथा जड़े काली पड़ जाती हैं l
- पौध पीला पड़ जाता है और बृद्वि रुक जाती है उसके पश्चात पौधे की मौत तक हो जाती हैं l
नियंत्रण
- मूँगफली के साथ फसल चक्र अपनाए l
- खरपतवार नियंत्रण करे l
- डाइमेथोएट या कार्बोफुरान 1 किलो प्रति हेक्टेयर की दर से प्रयोग करे l
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