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लांस सूत्रकृमि रोग

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लांस सूत्रकृमि रोग

वैज्ञानिक नाम:होप्लोलैमुस स्पेसीज(Hoplolaimus sp.)

 विवरण

  • लांस सूत्रकृमि बाह्य परजीवी तथा कभी-कभी अर्द्ध अंतःपरजीवी होते हैं l
  •  यह सूत्रकृमि उच्च तापमान और सूखी भूमि की स्थिति के लिए प्रतिरोधी होते हैं l
  •  इस सूत्रकृमि का लार्वा, वयस्क सूत्रकृमि के समान होता हैं लेकिन लम्बाई में ये छोटे होते हैं l
  • इस समूह के सूत्रकृमि मिट्टी का नमूना लेते समय आसानी से पता चल जाते हैं l

 लक्षण

  • लांस सूत्रकृमि अपना भोजन जडों बाहरी की पर सतह लेते हैं लेकिन ये कभी-कभी अपने शरीर को थोडा  सा जड़ में  भेद कर भोजन लेते हैं l
  • लांस सूत्रकृमि द्वारा क्षतिग्रस्त जडों का विकास प्रतिबंधित हो जाता हैं तथा जड़े काली पड़ जाती हैं l
  • पौध पीला पड़ जाता है और बृद्वि रुक  जाती है उसके  पश्चात पौधे की मौत तक हो जाती हैं l


 नियंत्रण

  • मूँगफली के साथ फसल चक्र अपनाए l
  • खरपतवार नियंत्रण करे l
  • डाइमेथोएट या कार्बोफुरान 1 किलो प्रति हेक्टेयर की दर से प्रयोग करे l

 

 

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