लीची का वानस्पतिक विवरण (प्ररोह तंत्र) -
ऊँचाई : 6-10 मीटर
चौडाई : 6-8 मीटर
- पेड़ों का शिखर आकार गोल एवं विस्तारशील होता है। शिखर घनत्व सघन, वृध्दि दर मध्यम होती है।
- पर्ण विन्यास - एकान्तर
- पर्ण प्रकार - विषम पिच्छाकार रूप में संयुक्त
- पर्णक आकार - अण्डाकार, भालाकार, आयतरूप
- पर्णकों की संख्या - 6-7
- पर्ण प्रकार एवं स्थायित्व - चौड़ी पत्ती एवं सदापर्णी
- पर्ण फलक लम्बाई एवं चौड़ाई - क्रमश: १०-२० से.मी. एवं ५-१० से.मी.
- पत्ती का रंग - हरा
- पुष्प गुच्छ - शाखित
- पुष्प रंग - पीला
- पुष्प अभिलक्षण - भड़कीला, बसन्त ऋतु में पुष्पन
- वृक्ष के बढ़ने पर शाखाएं लटक जाती हैं। अनेक स्तम्भ पाए जाते हैं जो भड़कीला एवं काँटों के बिना होते हैं।
- वर्तमान वर्ष की टहनियों का रंग - हरा
- वर्तमान वर्ष की टहनियों की मोटाई - पतली
मूलतंत्र - मूसला मूलतंत्र 1 मृदा पृष्ठ से 25-30 से.मी. नीचे पोषक जड़ें उपस्थित होती हैं जो मुख्यत: खनिज पोषकों एवं जल के अवशोषण के लिए उत्तरदायी होती हैं।
2- तुड़ाई के बाद गुणवत्ता में सुधार नहीं होता हैं। अत: वृक्ष पर उचित ढंग से पकने देना चाहिए। फलों में तुड़ाई के बाद श्वसन दर नहीं बढ़ती है।
3- उपोष्णकटिबंधीय फल - यह ऐसे क्षेत्रों में उगाया जाता है जहाँ ठंडा, शुष्क, पालारहित, शीतकाल और अधिक वर्षा एवं आर्द्रता से युक्त लम्बा गर्म ग्रीष्मकाल होता है।
4- जलवायु - उपोष्णकटिबंधीय क्षेत्र
आपेक्षिक आर्द्रता - 60 प्रतिशत से ऊपर
वर्षा - उच्च से लेकर साधारण वर्षा
तापमान - 18-270 से0 (पुष्पन से फलक तक तापमान 21-400 से0 होता है।
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