1- फल तुड़ाई के बाद का प्रबन्धन :
श्रेणीकरण - यह फल के आकार एवं रंग के अनुसार किया जाता है।
पैकेजिंग - तुड़ाई के बाद फलों को ठण्डे, शुष्क एवं सुवातित कमरों में रखना चाहिए। निर्यात के लिए फलों को तुड़ाई के तत्काल बाद सामान्यत: शीतल जल निमज्जन साधन या शीतलित वायु में खुला रखकर 0-20 से0 के तापमान तक ठण्डा किया जाता है। लम्बी दूरी तक परिवहन से पूर्व लीची के फलों को गंधक से उपचारित किया जाता है। कुछ पत्तियों के साथ लीची के फलों को नालीदार फाइबर बॉक्सों में या दफ्ती के डिब्बों में पैक कर लेना चाहिए।
मूल्य वर्धन - लीची से विभिन्न उत्पाद जैसे कैन्डी, जैम, रस, लीची नट, स्क्वाश आदि तैयार किए जाते हैं जो घरेलू के साथ-साथ विदेशी बाजार में अच्छी कीमत देते हैं।
भण्डारण - लीची के फलों को 2.5 से 4.00 से0 पर 3 महीने तक भण्डारित किया जा सकता है। फलों के भण्डारण के लिए नियंत्रित वातावरण भण्डार एवं निम्न तापमान भण्डारों का उपयोग किया जाता है।
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