सफेद सिरा नेमाटोड (White Tip Nematode)
कारक:एफेलेनकोइडीज़ ओराइज़ी (Aphelenchoides oryzae ) या ए. बेसियाई (A. besseyi)
विवरण: यह धान के बीज पर काफी दिनों तक जीवित रहता है । यह रोगजनक बाहय परजीवी है और प्रारम्भ में बेल्लित (Rolled) दशा में रहता है, परन्तु बालियाँ निकलने के बाद भ्रूणपोष (Endosperm) में चला जाता है । ये दाने पर भी पाए जाते हैं । रोग-ग्रस्त बीजों की बिजाई के बाद, नेमाटोड बाहर निकलकर छोटी पत्तियों पर आ जाते हैं ।
लक्षण:
पत्तियों की नोक ऊपर से २.५ से ५ सें.मी. हरितमाहीन होकर सफेद हो जाती है, जो बाद में भूरी होकर फट जाती है । रोग ग्रस्त पौधे छोटे और कमजोर हो जाते हैं, जिन पर छोटी-छोटी बालियां निकलती हैं । रोगग्रस्त बालियों में दानों की संख्या कम तथा दानों का आकार विकृत हो जाता है । ध्वज पत्ती में एक विशेष प्रकार की ऐंठन आ जाती है, जिसका सिरा बाद में गाढे रंग का हो जाता हैं, बाद में पत्ती सूख जाती है ।
नियंत्रण:
- फसल के पूर्व अवशेषों को जलाएं ।
- बिजाई से पूर्व ६ घन्टे भिगोए हुए बीज को ५२ डिग्री से. गर्म पानी में १० मिनट रखे अथवा बीज को ६ घंटे के लिए ०.२ प्रतिशत मैंकोजैव (Mancozeb) और मानोक्रोटोफास (Monocrotophos) घोल में भिगोएं ।
- पौदशाला में ३३ कि.ग्रा. कार्बोफ्यूरान ३ जी प्रति हैक्टर का प्रयोग करें ।
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