गेहूँ की कटाई कब करें
राजीव कुमार
गो0ब0पन्त कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय, पन्तनगर,
फसल की कटाई किसान के लिए सबसे महत्वपूर्ण है। यह समय उसकी लागत तथा परिश्रम का परिणाम होता है। गेहूँ की कटाई से लेकर बेचने तक की अवधि में कई प्रकार के कार्य किए जाते हैं जिनका अलग-अलग महत्व है। गेहूँ की विधि खेती के क्षेत्रफल पर निर्भर पर निर्भर करती हैं यदि खेत छोटे-छोटे टुकडों में बिखरे हुए हैं तो कटाई हंसिया से की जाती है, लकिन यदि खेत का क्षेत्रफल काफाी बडा है तो फसल की कटाई रीपर या मोअर से की जा सकती है। बडे पैमाने पर खेती के लिए कम्बाइन प्रयोग में लाई जाती है।
फसल को पकने के तुरंत बाद काट लेना चाहिए क्योंकि अधिक पकने पर कुछ किस्मों में दाने झडने लगते है। इसके अतिरिक्त पकने के बाद काटने में देरी करने से चूहों तथा चिडियों से भी नुकसान हो सकता हें कभी-कभी काटने में देर करने से गेहूँ के गुण पर भी बुरा प्रभाव पडता है। पकने की अवस्था का अनुमान किसान अपने अनुभव के आधार पर लगा सकते है। साधारणत: फसल पकने पर पत्तियां सूख जाती है, हालांकि कभी-कभी एक-दो पत्तियां हरी भी रह सकती हैं तथा बाली के नीचे का भाग सुनहरा हो जाता हैं। दानों को यदि अंगूठे से दबाया जाय तो दूध नहीं निकलता तथा दाने में कडापन आ जाता है। इसके अतिरिक्त अगर नमी नापने की सुविधा हो तो दाने में 25-30 प्रतिशत नमी रह जाने पर फसल काटी जा सकती हैं परीक्षणों से पता चला है कि 25 प्रतिशत नमी होने पर गेहूँ पक जाता है। यदि इसके बाद कटाई करत हैं तो दानों के तथा अन्य कारणों से प्रति हैक्टर प्रतिदिन तक हानि होती है। करीब 5-10 प्रतिशत दानों की हानि झडने, चिडियों, चूहों तथा मौसम की खराबी से होती है।
यदि दानों में नमी की मात्रा सही नही है तो कम्बाइन से कटाई करने पर कुछ दानों का (जो बाली से नही निकल पाते) नुकसान हो जाता है। गेहूँ की फसल को काटने से पहले सिंचाई बंद कर देनी चाहिए तथा फसल को गिरने से बचाना भी अत्यन्त आवश्यक है। विभिन्न किस्मों की कटाई का समय भिन्न-भिन्न होता है क्योंकि उनके पकने की अवधि में अंतर होता है।
अप्रैल के अंत तक प्राय: सभी किस्मों को काट लेना चाहिए। गेहूँ की कटाई के बाद गठ्ठर बांध कर जमा कर लें। गेहूँ काटने के बाद 4-5 दिन धूप में सुखाकर गहाई कर लेनी चाहिए। यह काम बैलों से दांय चलाकर या थ्रेसर से किाया जा सकता है। इसके बाद दाना और भूसा अलग-अलग कर लें। देशी किस्मों में भूसे की मात्रा करीब दोगुनी या इससे भी ज्यादा हो जाती है लेकिन उन्नत किस्मों में भूसे की मात्रा करीब बराबर या थोडी अधिक निकलती है। जहां तक हसे सके गेहूँ की गहाई के बाद दाना और भूसा संभाल दें अन्यथा वर्षा अथवा आंधी से हानि हो सकती है। यदि गेहूँ को खाने के लिए रखना है तो बोरों में अच्छी तरह साफ करनें और सुखाकर रख लेना चाहिए।
यदि बीज के लिए रखना है तो बीज को थाइराम (एक भाग थाइराम तथा 500 ग्राम बीज) या 0.25 प्रतिशत की दर से वाइटाबैक्स से उपचारित करके रखना चाहिए। उन्नत ढंग से खेती करने पर बौनी किस्मों की औसत उपज 50-60 क्विटल प्रति हैक्टर तक मिलती है। लंबी देशी किस्मों को इसकी लगभग आधी उपज प्राप्त होती है।
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