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तना गलन (Stem rot) |
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कारक: मैग्नापोर्थि सेल्विनी (Magnaporthe salvinii ) विवरण: यह दक्षिण पूर्वी एशिया के उन सभी क्षेत्रों में पाया जाता है, जहाँ धान की वर्ष भर लगातार खेती होती है । फसल की कटाई के बाद भी खेत में बचे हुए तने के भीतर स्कलेरोशियम पर्याप्त मात्रा में रहते हैं । ये प्रतिकूल वातावरण के लिए काफी सहनशील होते है और दूसरे वर्ष धान की रोपाई तक पौधे के अवशेषों में जीवित रहते हैं । वर्षा होने / पानी मिलने पर ये स्कलेरोशियम, पानी में तैरने लगते हैं और रोपे गये पौधों के पर्णच्छद के पास जाकर संक्रमण करते हैं । प्रायः रोग उन खेतों में अधिक होता है जहाँ पानी काफी समय तक ठहरता है तथा जहां जल निकास सुविधा अच्छी नहीं है । तना-छेदक कीट से ग्रस्त पौधे भी इस रोग के प्रति अधिक ग्राही हो जाते हैं । |
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लक्षण |
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नियंत्रण
धान के खेत में अधिक समय तक पानी न ठहरने दें, समय-समय पर इसे निकालते रहें । |
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