समेकित कृषि पद्धतियाँ
समेकित कृषि पद्धति खेती की एक ऐसी विधि है जिसमे फसल उत्पादन के साथ-साथ अन्य सह व्यवसाय जैसे पशु, मुर्गी, मधु-मक्खी , रेशम, खरगोश पालन आदि का भी किया जाता है. इस पद्धति में खेती के एक अवयव से प्राप्त अवशेष का उपयोग दुसरे अवयव की उत्पादकता बढ़ने में किया जाता है. समेकित कृषि पद्धति से खेती से अधिक उत्पादन एवं लाभ प्राप्त होता है. अतः वैश्विक प्रतिस्पर्धा में टिकने के लिए कृषि को लाभकारी धंधा बनाने के लिए उत्पादन लागत में कमी लाने में समेकित कृषि पद्धतियाँ सहायक है . इसके अतिरिक्त उपलब्ध जल से अधिक उत्पादन प्राप्त कर जल की उत्पादकता में भी बढ़ोत्तरी होती है. किसानो की आर्थिक दशा, तकनीकी ज्ञान एवं क्षेत्रीय अनुकूलता के आधार पर समेकित कृषि पद्धति के विभिन्न माडलों पर किये गए प्रदर्शनों एवं पंतनगर विश्वविद्यालय में संस्था-ग्राम संपर्क कार्यक्रम के परिणामों के आधार पर समेकित कृषि पद्धति माडल के विभिन्न अवयवों को अपना कर खेती से ही अधिक उत्पादन एवं कमाई की जा सकती है. इन पद्धतियों में जोखिम कम होता है एवं भूमि की उर्वरा शक्ति का ह्रास नही होता है और पर्यावरण प्रदूषण भी न्यूनतम होता है.
अधिक जानकारी के लिए संपर्क करे - गो. ब. पन्त कृषि एवं प्रोद्योगिक विश्वविद्यालय पंतनगर, उत्तराखंड
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