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Uttar Pradesh

भिण्डी की खेती

बैंगन की खेती

मटर की खेती

प्रभावी बिन्दु:
१. क्षेत्रीय अनुकुलतानुसार प्रजाति का चयन कर प्रमाणित बीज का प्रयोग करें |
२. समय से बुवाई करें |
३. फास्फोरस एवं गंधक हेतु सिंगल सुपर फास्फेट का प्रयोग करें |
४. रतुआ के नियंत्रण हेतु ०.१% जिंक सल्फेट का प्रयोग करें |

बरसीम की खेती

अलसी की खेती

प्रभावी बिन्दु:
१. संस्तुत प्रजातियों के प्रमाणित बीज प्रयोग करें|
२. संतुलित मात्रा में उर्वरक प्रयोग करें|
३. सिंचाई उपलब्धता होने पर फूल आने के समय कम से कम एक सिंचाई अवश्य करें|
४. गालमिज के नियंत्रण के लिए कली बनते समय ही किसी कीटनाशक का छिड़काव
करें|

कठिया (ड्यूरम) गेहूं की खेती :

कठिया गेहूँ की सफल खेती के लिए मुख्य बिंदु :
१. भरपूर उपज के लिए समय पर बुवाई करना आवश्यक है |
२. असिंचित तथा अर्धसिंचित दशा में बुवाई  के समय खेत में नमी का होना अति आवश्यक है |
३. कठिया गेहूँ की उन्नतशील प्रजातियों का ही चयन करके संस्तुत बीज विक्रय केद्रों से लेकर बोना चाहिए |
४. चमकदार दानो के लिए पकने के समय आद्रता की कमी होनी चाहिए |

प्रतिकूल परिस्थितियों में गेहूँ की खेती

भण्डारण:
बदलते परिवेश में मौसम का कोई भरोसा न करके उपज को बुखारी में या बोरों में भरकर साफ सुथरे स्थान में संरक्षित करें यदि सुखी नीम की पत्ती का विछावान डाल दें तो रसायनों का प्रयोग नही करना पड़ेगा |

शिशु मक्का उत्पादन

शिशु मक्का उत्पादन

जई की खेती

बोरो धान की खेती

पौधको ठंडक से बचाने के उपाय

१ पौधकी सिंचाई समुचित रूप से करतें रहना चाहिये।

२ लकड़ी/पुआल/गोबर की राख का द्दिड़काव सप्ताह में दो बार करते रहना चाहिये।

३ प्रातः पत्तियों पर एकत्र ओस को गिरा देना चाहियें।