|
कारक : जस्ते की कमी के कारण |
|
|
विवरण: यह रोग उत्तर प्रदेश की तराई मे धान की खेती के लिए १९५५ से ही एक समस्या बना हुआ है | उत्तर भारत के अन्य तराई क्षेत्रो मे भी यह बीमारी पाई जाती है|अब यह रोग भारत के प्रदेशो जैसे आन्ध्र प्रदेश पंजाब,एवं बंगाल ,आदि मे पाया जाता है| |
|
|
लक्षण: इसमे पत्तियो पर हल्के पीले रंग के धब्बे बनते जो बाद मे कत्थई रंग के हो जाते है|पौधा बौना रह जाता है और व्यात कम होती है|प्रभावित पौधो की जडे भी कत्थई रंग की हो जाती है| |
|
|
नियंत्रण: इसकी रोकथाम के लिए फसल पर ५ कि०ग्रा० जिक सल्फेट२.५ कि०ग्रा०बुझे चूने के सा१०००लीटर पानी मे मिलाकर प्रति हैक्टर( क्रमशः१००ग्राम एवं ५०ग्राम प्रति नाली) छिड़काव करना चाहिए।पौधशाला मे उपरोक्त के दो छिड़कावबुवाई के १० तथा२० दिन बाद करने चाहिए।बुझा हुआ चूना उपलब्ध न होने पर २ प्रतिशत यूरिया तथा जिक सल्फेट का छिड़काव करे। |
|
- 17530 reads
