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गंधी कीट

गंधी कीट (Gundhi bug)

वैज्ञानिक नाम : लेप्टोकोरिसा  एकुटा (Leptocorisa acuta )

पहचान: इस कीट की दो मुख्य स्पीसीज Leptocrisa acuta Thunb.एवं L. oratorius Fabricius. पाई जाती है, जिनमें भारत के लिए प्रथम स्पीसीज़ महत्वपूर्ण है । युवा कीट १४ से २७ मि.मी. लम्बा तथा भूरे रंग का होता हैं, दोनों युवा एवं निप्फ धान के पौधे जैसे ही रंग के होते हैं, परन्तु अपनी विशेष बदबूदार गंध से पहचाने जाते हैं । मादा युवा कीट पत्ती के किसी भी ओर १ से २ पंक्तियों में २५० से ३०० अंडे रखती है, जो है, जो ५ से ६ दिन में निम्फ में परिवर्तित हो जाते हैं । निप्फ बहुत छोटा तथा हरे रंग का होता है, बढ़वार के साथ भूरे रंग का हो जाता है, इसकी अवधि १३ से १७ दिन होती है ।

क्षति की प्रकृति: गंधी कीट के लिए सांवक (ई. कोलोना) उपयुक्त परपोषी है, यह कीट अन्य घास एवं फसलों पर भी जीवन यापन करता है । धान की फसल में परागण के बाद, इस कीट के युवा तथा निम्फ दोनों ही भरते हुये दानों युक्त बालियों पर संक्रमण करते हैं तथा दानों में बने दूध को चूसते हैं । खेत में सीधी खड़ी बालियों से इनकी क्षति अनुमानित की जा सकती है, क्यों कि इन बालियों में दाने खाली होते हैं । क्षतिग्रस्त दानों पर भूरें रंग का धब्बा होता है, इसी स्थान से कीट ने धान के दाने में छेद करके रस चूसा होता है ।

 

नियंत्रण:

  • खेत के आसपास के पौधों (खरपतवारों आदि) को नष्ट करें ।
  • कीटनाशी धूल पैराथियान (Parathian) या मैलाथियान (Malathian) -२५ कि.ग्रा. /है. को धूलित करें ।

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