Submitted by kiran yadav on Tue, 08/06/2010 - 23:23
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धान के रोपाई
रोपाई के दौरान :
- पौध उखाड़ने के एक दिन पहले नर्सरी मृदा को स्यूडोमोनास फ्लुओरेन्स (1 ग्राम/वर्ग मीटर) से तस्बतर करना या स्यू फ्लुओंरेसेन्स (5 ग्रा0/ली) के निलंबन में पौधें की जड़ों को डुबोना।
- जीवाणु अंगमारी से बचले के लिए पूरी या आंषिक छाया में रोपाई से बचिए। छाया में एक बार जीवाणु अंगमारी का आक्रमण हो जाने पर षेश खेती के लिए वह निवेष द्रव्य का स्रोत बन जाता है।
रोपाई के बाद परिपक्कता तक :
- तना वेधक के नियंत्रण के लिए धान की रोपाई के एक सप्ताह के भीतर फीरोमोन ट्रैप (5 मि0 ग्रा0 फीरोमान प्रति ट्रैप: 20 ट्रैप प्रति हैक्टेयर, 20X25 मीटर दूरी) का प्रयोग कीजिए और इसके 30 दिन बाद प्रलोभक (चारा) बदल लीजिए। नर्सरी में और फसल की प्रारम्भिक अवस्था में 50 सेमी0 पर ट्रैप की ऊँचाई बनाए रखिए। जैसे - जैसे पौधे बढ़ते जाते है, ट्रैपों की ऊँचाई बढ़ाते रहना चाहिए। जिससे कि वे सदैव फसल वितान (कैनोपी) के लगभग 30 सेमी0 मी0 ऊपर बने रहें।
- जल खड़ा रहने मत दीजिए और कीट एंव रोग के आक्रमण के समय पर खेत से जल निकाल देना चाहिए।
- प्रयोग के एक सप्ताह पहले नीम की पत्तिायों के साथ मिश्रित 10% गोमूत्र का छिड़काव कीजिए। गोमूत्र का छिड़काव रोपाई के 25 दिन के बाद प्रारम्भ करना चाहिए और उसके बाद 15 दिन के अंतर पर 3-4 छिड़काव करना चाहिए।
- ट्राइकोडर्मा हार्निएनम एवं स्यूडोमोनास फ्लुओंरेसेन्स से उपचारित 5% वर्मीवाष/कम्पोस्ट टी का छिड़काव व कीजिए।
- पर्णच्छद अंगमारी, पर्णच्छद निगलन एंव ग्रीव प्रध्वंस के नियंत्रण के लिए पुश्पगुच्छ षुरूआत पर स्यूडोमोनास फ्लुओंरेसेन्स एंव ट्राइकोडर्मा हार्जिएनम 65 ग्राम प्रत्येक प्रतिलीटर जल के सुसंगत विभेदों (स्ट्रेनों) या पंत बायो - एजेन्ट - 3 (10 ग्राम/ली0) के मिश्रित सूखा का छिड़काव कीजिए। साप्ताहिक अंतर पर एक या दो छिडकाव किया जाता है।
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