कारक जीव: धान प्रचंड वृद्धि विषाणु (Rice ragged stunt virus)
विवरण:
धान प्रचंड वृद्धि विषाणु सर्वप्रथम १९७६ में इंडोनेशिया तथा फिलीपिंस में पहचना गया था उसके पश्चात यह अन्य देशों में पहुँचा यह विषाणु भूरा तैला की विभिन्न प्रजातियों के द्वारा प्रसारित होता है । इस विषाणु का इंकुवेशन समय ४-३३ दिन का होता है ।
लक्षण:
पौधो की बढवार रुक जाती है तथा पत्तियों का उपरी भाग सिकुड़कर फूल जाता है । इस विषाणु से प्रभावित पौधो की बढवार में ४०-५०% तक की रुकावट होती है जो कि विभिन्न प्रजातियों की सुग्राही रूकावट पर आधारित है । पत्तियाँ पर अनियमित आकार के धब्बे पड़ जाते हैं तथा पत्तिया सिकुड़ जाती है । यह धब्बे सभी पत्तियों पर न होकर कुछ पत्तियों पर दिखाई पड़ते हैं इससे प्रभावित पौधो में बालिया नही बनती हैं यदि बनती हैं तो उनमे दाने नही भरते हैं
नियंत्रण:
- रोग रोधी किस्मों का चुनाव करे।
- भूरा तैला के नियंत्रण के लिए कीटनाशिया का प्रयोग करे।
- संक्रमित पौधे को उखड कर नष्ट कर दे।
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