Introduction
:
मक्का की खेती चारा तथा दाना दोनो के लिए की जाती है। इसका चारा मुलायम होता है तथा पशु चाव से खाते है। यह एक निर्वाहक आहार है। इसमें फलीदार फसलों की खेती जैसे लोबिया के साथ (२:१) के अनुपात में की जानी चाहिये।
Soil Conditions
:
अच्द्दे जल निकास वाली दोमट, बलुई दोमट भूमि इसकी खेती के लिए उपयुक्त है।
Varieties
:
प्रायः दाने वाली जातियां चारे के काम में लाई जाती है। संकर मक्का में प्रोटीन , गंगा-२ ,गंगा-५ ,गगा-७ , संकुल मक्का में किसान , अफ्रीकन टाल और विजय तथा देशी में टाइप-४१ मुख्य किस्में है। संकर मक्का के बीज उत्पादित बीज चारे की बुवाई में प्रयोग किया जा सकता है।
Field preparation
:
एक जुताई मिट्टी पलटने वाले हल से तथा एक या दो जुताइयां देशी हल से करके भूमि तैयार की जाती है।
Seed & Sowing
:
बुवाई का समय: जून या जुलाई में पहली वर्षा होने पर इसकी बुवाई करनी चाहिये। बीज दर: ४०-५० किग्रा० प्रति हेक्टर बीज शुद्घ फसल की बुवाई के लिए पर्याप्त होता है। फलीदार चारे जैसे लोबिया के साथ (३:१) के साथ मिलाकर बोना चाहिये। बुवाई की विधि: बीज लाइनो में ३०से.मी. की दूर पर बोना चाहिये।
Nutrient management
:
संकर तथा संकुल किस्मों में ८०-१०० किग्रा. तथा देशी किस्मों में ५०-६० किग्रा. प्रति हे. की दर से नत्रजन की दो तिहाई मात्रा बुवाई के समय तथा शेष एक तिहाई बुवाई के ३० दिन बाद खेत में डालना चाहियें।
Water management
:
वर्षाकाल में बुवाई करने पर सिचाई की आवश्यकता पड़ती है।
Harvesting & Threshing
:
प्रायः मादा मंजरियों के निकलने की आवस्था में फसल चारे के लिए काटनी चाहियें। यह अवस्था बुवाई के ६५ से ७५ दिन बाद आ जाती है।
Yield
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हरे चारे की औसत उपज लगभग २५०-३०० कुन्तल प्रति हेक्टर होती है।,
मकचरी
मकचरी की यह विशेषता है कि एक ही कल्ले से अनेक कल्ले फूटते है। जिसके कारण एक द्दोटा सा समूह बन जाता है। प्रति हेक्टर ४० किग्रा. बीज की आवश्यकता होतीहै। इसकी बोने की विधि मक्का के समान है। १०० किग्रा. नत्रजन तथा ४० किग्रा फास्फोरस प्रति हेक्टर की दर से प्रयोग करना चाहिये। फसल बुवाई के २.५३ माह बाद चारे की कटाई के योग्य होती है। एम.पी. चरी की भॉति इसकी दो से तीन कटाइयॉ प्राप्त जा सकती है परन्तु उपज उससे कुद्द कम होती है।