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मक्का की बुआई

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मक्का की बुआई

अमित भटनागर
गो00पन्त कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय, पन्तनगर,

    

     मक्का की खेती उचित मृदा प्रबंध द्वारा अनेक प्रकार की भूमियों में की जा सकती है किन्तु अच्छी बढवार और पैदावार के लिए उचित जल निकास एवं वायु संचार युक्त उपजाऊ दोमट मिट्टी अच्छी समझी जाती है। मृदा का पी0एच0 मान 6 से 7 मक्का की खेती के लिए अच्छा समझा जाता है। मक्का की अच्छी पैदावार के लिए अच्छी धूप की आवश्यकता होती है और बोने के समय वायुमण्डल का तापमान 18-200 से0 होना चाहिए। यदि तापमान 9-100से0 कम है तब अंकुरण्ा अच्छा नहीं होता है। मक्का की बढवार के समय तापमान 25-300से0 अच्छा समझा जाता है। पकते समय गर्म एवं शुष्क वातावरण ठीक होता है। पाला फसल के लिए हर अवस्था पर हानिकारक होता है और फसल पूर्णतया नष्ट हो जाती है। मक्का को 3000 मीटर ऊंचाई तक उगाया जा सकता है। मक्का खरीफ मौसम में उगाई जाती है अत: वर्षा से इसकी जल आवश्यकता की पूर्ति होती रहती है। जिन क्षेत्रों में वर्षा 15-50 से0मी0 तक होती है वहॉ भी मक्का को बिना पानी के सफलतापूर्वक उगाया जाता है सामान्यत: 50-80 से0मी0 वर्षा मक्का की उचित खेती के लिए आवश्यक है।

बीज एवं बुआई

बीज शोधन- बुवाई से पहले बीज को थायरम या कैप्टान की 4.0 ग्राम दवा से प्रति कि0ग्रा0 बीज की दर से उपचारित करें जिससे बीज सडन और पौध अंगमारी, पत्ती अंगमारी तना सडन, शीर्ष कंड आदि बीमारियों से फसल का बचाव हो जाता है। जिन क्षेत्रों में भूरा धारीदार मृदुरोमिल आसिता का प्रकोप अधिक होता है, वहॉ बीज को एप्रान 35 डब्ल्यू0एस0 की 3.5 ग्राम दवा से प्रति कि0ग्रा0 बीज की दर से उपचारित करके बोने पर इस बीमारी से फसल का बचाव किया जा सकता है।

बीज की मात्रा

बीज की मात्रा प्रजाति एवं उपयोग के आधार पर 15-18 कि0ग्रा0 बीज प्रतिहै0 या 300-350 ग्राम प्रति नाली, संकर मक्का के लिए 20-25 कि0ग्रा0 प्रति है0 या 400-500 ग्राम/नाली, पॉपकार्न के लिए 12-14 कि0ग्रा0 प्रति है0 या 240-280 ग्राम तथा बेवीकार्न के लिए 40-45 कि0ग्रा0 प्रति है0 या 800-900 ग्राम प्रति नाली बीज की आवश्यकता पडती है। हरे चारे हेतु 40-45 कि0ग्रा0 बीज प्रति है0 की दर से बोना चाहिए।

बोआई की विधि

मक्का को उचित समय पर बोना चाहिए (सारणी-2)। बुवाई सदैव लाइनों में करनी चाहिए और लाइन से लाइन की दूरी 60 से0मी0 तथा पौधे से पौधे के बीच की दूरी 25-30 से0मी0 रखनी चाहिए इसके लिए सीडड्रिल या हल के पीछे बनी लाइनों या चोगा विधि द्वारा बुवाई की जा सकती है। सामान्यतया प्रति है0 पौधों की संख्या 65000 से 75000 होनी चाहिए। बेवीकार्न के लिए पौधों की संख्या 1.11 से 1.66 लाख प्रति है0 रखना लाभदायक रहेगा। बेवीकार्न के लिए 50 से0मी0 पर बनी लाइनों में पौधे से पौधे की दूरी 15 से0मी0 रखी जाती है। मक्का के बीज को 3.5-5.0 से0मी0 की गहराई पर बोना चाहिए। यदि जमाव कम हुआ है, तब अंकुरण के तुरन्त बाद उपचारित बीज को खाली जगह पर बो देना चाहिए। यदि पौधों की संख्या अधिक है, तब अंकुरण के 15-20 दिन बाद घने पौधों को उखाड देना चाहिए। मक्का को अमूमन, मानसून आने पर बोया जाता है। मक्का के बोने का उचित समय किस्म एवं स्थान विशेष के अनुसार अलग-अलग है

मक्का की बुवाई का उचित समय क्षेत्र के आधार पर

  1. तराई, भावर एवं मैदानी क्षेत्र
  • देर से पकने वाली किस्में
  • मई द्वितीय पक्ष से जून प्रथम पक्ष
  • जल्दी पकने वाली किस्में

जून के अन्त से जुलाई का प्रथम सप्ताह

  • 2- निचले पर्वतीय क्षेत्र : मई से जून मध्य तक
  • 3- मध्यम एवं ऊँचे पर्वतीय क्षेत्र: अप्रैल अन्त से मइ प्रारम्भ तक

 


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