Submitted by kanchannainwal1 on Tue, 19/01/2010 - 11:07
मूल तंत्र
- मूल तंत्र का कार्य दोहरा होता है:
-पहला, यह मृदा से जल एवं पोशकों के अंतर्ग्रहण में समर्थ बनाता है, और
-दूसरा, यह पौधे को सहारा प्रदान करने का कार्य करता है।
- रोपे गए बीज खंड से दो प्रकार की जड़ें विकसित होती हैं।
जड़ पट्टी से निकलने वाली बीज खंड (सेट) जड़ें पतली एवं अधिक शाखित होती हैं; प्ररोहों की निचली जड़ पत्तियों से उत्पन्न होने वाली प्ररोह जड़ें मोटी, गूदेदार और कम शाखित होती हैं।
- प्रत्येक नई दोजी (प्ररोह) अपनी जड़ें विकसित करेंगी जो अंततोगत्वा मूल प्ररोह जड़ों का कार्य अधिकार में लेती हैं।
- जड़ के सिरे की लम्बवत काट में चार हिस्से होते हैं:
(1) जड़ टोपी, (2) वर्धन शिखा, (3) दिर्घिकरण क्षेत्र, और (4) मूल रोम क्षेत्र।
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