Submitted by deepalitewari on Fri, 20/11/2009 - 16:44
सब्जी मटर की अगेती प्रजातियाँ
- अच्छे आर्थिक प्रतिफल के कारण ये भारत में अधिक लोकप्रिय हैं।
- वे अधिक उपज देने वाली नहीं होती है परन्तु उत्पादको के अधिक प्रारंभिक पारिश्रमिक (लाभ) प्रदान करती हैं।
- इन प्रजातियों में सामान्यत: हरी फलियों को दो बार चुनने का कार्य किया जाता है। पहली चुनाई बोआई के 60 दिन बाद और दूसरी पहली चुनाई के 15-20 दिन बाद की जाती है।
- परिपक्वता अवधि 60-80 दिन होती है।
विभिन्न प्रजातियों का विवरण नीचे दिया गया है:
1- असौजी
- भारतीय कृषि अनुसंधान संस्थान पर विकसित बौनी, हरी और चिकने बीज वाली प्रजाति है।
- फलियाँ अकेली लगती हैं।
- बोआई के 30-35 दिन बाद पुष्पन प्रारम्भ होता है। और पुष्प पुंज 6-7 गाँठों पर प्रकट होते है।
- फलियाँ लगभग 8 से. मी. लम्बी, टेढ़ी, गहरे हरे रंग की एवं संकुचित होती है और उस समय गोल प्रतीत होती हैं जब वे पूरी तरह से विकसित हो जाती हैं।
- प्रत्येक फली में सात बीज होते हैं।
- फलियाँ 45 प्रतिशत अधिक दाना देती हैं।
2- अर्ली सुपर्ब
- यह पीताभ हरे पर्णसमूह से युक्त इंगलैंड से लाई गई एवं बौनी प्रजाति है।
- यह बोआई के 45 दिनों के बाद पुष्पित होता हे और प्रथम पुष्पपुंज 8-10 वीं गाँठ पर प्रकट होता है।
- फलियाँ अकेली लगती है। ये गहरे हरे रंग की एवं टेढ़ी होती है। इनमें 6-7 चिकने बीज होते है।
- इसमें फलियों से 45 प्रतिशत अधिक दाना मिलता है।
3- मीटिअर
- इंगलैंड से लाई गई प्रजाति है।
- पौधे 35-40 से0मी0 ऊँचे, गहरे हरे रंग के होते है। फलियाँ अकेली लगती है और वे गहरे हरे रंग की, 8.7 से0 मी0 लम्बी और 7 चिकने बीजों से युक्त होती है।
- उससे दाना निकलने का प्रतिशत अधिक (45%) है।
4. आर्किल
- व्यापक रूप से उगाई जाने वाली यह प्रजाति फ्रांस से आई विदेशी प्रजाति है।
- पौधा बौना होता है परंतु वृध्दि जोरदार होती है और 45 से0मी0 तक बढ़ सकती है।
- पुष्प सफेद होते है और 6-7 गॉठो पर एक - दो लगती हैं।
- यह 35 - 40 दिनों में पुष्पित होती है।
- फलियाँ गहरे हरे रंग की 8.5 से.मी. लम्बी, संधि रेखाओं की ओर अंतर्वक्र और दूरवर्ती सिरे पर नुकीली होती है और उनमें 8-10 अच्छी तरह से भरे हुए झुर्रीदार बीज होते हैं।
- इसमें दाना निकलने का प्रतिशत अधिक (40%) है।
- यह ताजा बाजार में बेचने और निर्जलीकरण दोनो के लिए उपयुक्त है।
- पहली चुनाई बोआई के बाद 60-65 दिन लेती है।
- हरी फली के उपज 8-10 टन प्रति हैक्टेयर है।
5. अर्ली बैजर
- बौनी, झुर्रीदार बीज वाली यह प्रजाति संयुक्त राज्य अमेरिका से आई है।
- फलियाँ बोआई के 60-65 दिनो के भीतर चुनाई के लिए तैयार हो जाती है।
- 10-11 वीं गॉठ पर पहला पुष्पगुच्छ प्रकट होता है: फलियाँ पीली हरी, और अकेली पैदा होती है और 7.5 से0मी0 लम्बी एवं 5-6 मोटे एवं मीठे बीजों से युक्त होती है।
- यह अच्छी डिब्बाबंद की जाने योग्य प्रजाति है और फ्यूजेरियम म्लानि प्रतिरोधी होती हैं।
6. लिटिल मार्वल
- यह इंग्लैंड से आई बौनी झुर्रीदार बीजों वाली प्रजाति है।
- इंग्लैंड में यह प्रजाति संकर चैलेसी x सटन्स अलास्का से प्रजनित की गई।
- इसका पर्णसमूह गहरे हरें रंग का होता हैं: बोआई के 40 दिनों के बाद 9-11 वीं गॉठ पर पहला पुष्पगुच्छ प्रकट होता है।
- फलियाँ 8 से0 मी0 लम्बी, अकेली, मोटी, चमकदार, गहरे हरे रंग की सीधी एवं चौड़ी और 5-6 अधिक मीठे बीजों से युक्त होती हैं।
7. अलास्का
- यह इंग्लैंड से आई प्रजाति है।
- फलियाँ हलके हरे रंग की होती हैं और अकेले एंव 5-6 छोटे नीले - हरे रंग के बीजों से युक्त होती है।
8. बी0 एल0 - अगेती मटर - 7 (वी एल - 7)
- विवेकानन्द पर्वतीय कृषि अनुसंधान संस्थान अल्मोड़ा में संकर उपहार X आर्किल से उन्नत पीढ़ी वरण द्वारा विकसित प्रजाति है।
- पौधे बौने, गहरे हरे वर्णसमूह और सफेद पुष्पों से युक्त होते हैं।
- फलियाँ हलके हरे रंग की आकर्षक, मध्यम आकार की लगभग 8 से.मी. की एवं 6-7 बीजों से युक्त होती है।
- बीज हल्के हरे रंग के गङ्ढायुक्त मोटे, कुल विलेय ठोस (16.8%) से युक्त अधिक मीठे होते हैं।
- छिलका उतारने पर 42% दाना के साथ 10 टन / हैक्टेयर की औसत उपज
9. जवाहर मटर 3 (जे एम 3, अर्ली दिसम्बर)
- यह प्रजाति जबलपुर मे टी 19 x अर्ली बैजर के संकरण के बाद वरणों द्वारा विकसित की गई है।
- पौधा झाड़ीदार वृध्दि आदत से युक्त 70-75 से0मी0 ऊँचा होता है, इसके फूल सफेद, फलियाँ हल्के हरे रंग की गोल - सी, अण्डाकार और 4-5 झुर्रीदार बीजों से युक्त होती है।
- इस प्रजाति में दाना प्राप्ति प्रतिशत अधिक (45%) होता है।
- बोआई के 50-50 दिनों के बाद पहली तुड़ाई प्रारम्भ होती है। औसत उपज 4 टन/हैक्टेयर है।
10. जवाहर मटर - 4 ( जे एम 4)
- यह प्रजाति जबलपुर में संकर टी 19 X लिटिल मार्वल से उन्नत पीढ़ी वरणों द्वारा विकसित की गई थी।
- पौधा 65 से0 मी0 ऊँचा और पर्णसमूह एवं तना हरे रंग का होता है।
- 70 दिनों के बाद पहली तुड़ाई शुरू होती है।
- फलियाँ हरे रंग की आकार में मध्यम (7 से.मी.) और 6-7 हरी झुर्रीदार एवं मीठे बीजों से युक्त होती हैं।
- 40% निकाले गए दानों से युक्त औसत फल उपज 7 टन/ हैक्टेयर होती है।
11. हरभजन (ईसी 33866)
- विदेशी आनुवंशिक सामग्री से वरण द्वारा जबलपुर में विकसित।
- यह अधिक अगेती प्रजाति है और इसकी पहली चुनाई बोआई के 45 दिनों के बाद की जा सकती है।
- पादप प्रकार छोटी मटर, गोल एवं छोटे होते हैं।
- औसत फली उपज 3 टन/हैक्टेयर है।
12. पंत मटर - 2 (पी एम - 2)
- यह पन्तनगर में संकर अर्ली बैजर x आई पी, 3 (पंत उपहार) से वंशावली वरण द्वारा विकसित हैं
- पौधे की ऊँचाई 50-55 से0मी0, होती है, फल लगना 6 वीं गॉठ से शुरू होता है।
- फलियाँ हरी, आकार में अपेक्षाकृत छोटी और 6- 8 मीठे झुर्रीदार बीजों से युक्त होती है।
- बोआई के 60- 65 दिन बाद पहली चुनाई शुरू होती है।
- यह भी चूर्णिल फफूंदी के प्रति अधिक ग्रहणशील है।
- औसत उपज 7 - 8 टन प्रति हैक्टेयर हैं।
13. मटर अगेता (E-6)
- यह संकर मैसी जेम X हरे बोना से वंशावली वरण द्वारा लुधियाना पर विकसित बौनी, अधिक उपज देने वाली प्रजाति है।
- पौधे बौने (40 से0 मी0), सीधे, ओजपूर्ण और तेजी से बढ़ने वाले होते है। पर्णसमूह हरे रंग का होता है। 1-2 फलियाँ गुच्छों में लगती है। पहली चुनाई बोआई के बाद 50-55 दिनों के भीतर प्रारम्भ होती है। फलियाँ लंबी एवं 6-8 गोल हरे बीजों से युक्त होती है। यह उच्च तापमान सहिष्णु है। 44% दाना से युक्त औसत फली उपज 6 टन/है0 होती है।
14. जवाहर पी - 4
- यह जबलपुर में एक पत्र संकरण लोकल यला बतरी x (6588x46 lh) से उन्नत पीढ़ी वरण द्वारा छोटी पहाड़ियों के लिए विकसित चूर्णिल फफूंदी प्रतिरोधी और म्लानि सहिष्णु प्रजाति है।
- छोटी पहाड़ियों पर पौधे लगभग 75 से 80 से0मी0 और मैदानों में लगभग 1 मीटर की ऊंचाई प्राप्त करते है: इसकी मध्यम आकार की फलियों में 5-6 मोटे हरे रंग के बीज होते हैं।
- पहली चुनाई छोटी पहाड़ियों में 60 दिन के बाद और मैदानों में 70 दिन के बाद प्रारम्भ होती है।
- छोटी पहाड़ियों में औसत फली उपज 3-4 टन/हैक्टेयर और मैदानों में 9 टन/हैक्टेयर होती है।
15. पंत सब्जी मटर - 3
- पंत सब्जी मटर-3 जल्दी तैयार होने वाली प्रजाति है।
- यह प्रजाति आर्किल X जी0सी0 141 से वंशावली वरण द्वारा विकसित की गई है।
- पौधे, बौने और पर्णसमूह गहरे हरे रंग का होता है।
- फलियाँ लम्बी और 8-10 बीजों से युक्त होती हैं।
- हरी फली उपज 9-10 टन प्रति हैक्टेयर है।
16. पंत सब्जी मटर - 5
- पंत सब्जी मटर - 5 जल्दी तैयार होने वाली प्रजाति है जिसका पौधा बौना होता है।
- फलियाँ, लंबी, अच्छी तरह से भरी हुई, और सिरे की ओर हलकी - सी मुड़ी हुई होती हैं।
- पकने पर बीज हरे एवं झुर्रीदार हो जाते हैं।
- यह प्रजाति चूर्णिल फफूँदी रोग प्रतिरोधी होती है।
- पहली हरी फली चुनाई 60 से 65 दिनों के भीतर की जा सकती है और बीज परिपक्कता बोआई के 100 से लेकर 110 दिनों में होती है।
- हरी फली उपज 90-100 क्विंटल प्रति हैक्टेयर है।
- यह प्रजाति कुमाऊँ की पहाड़ियों और उत्तराखण्ड के मैदानों में खेती के लिए उपयुक्त है।
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