मृदा
लीची के लिए अच्छे जल निकास वाली जलोढ मृदा उपयुक्त होती है। यह हल्की बलुई मृदा से लेकर भारी मटियार मृदाओं तक के व्यापक मृदाओं के परिसर में उगाया जा सकता है। अधिक जैव पदार्थ से युक्त बलुई दुमट मृदाएं इसकी बागवानी के लिए अच्छी होती हैं। यह लम्बे समय तक जल भराव का सामना नहीं कर सकता है। लीची की रोपाई करते समय गड्ढ़ों में पुराने वृक्षों के जड़ क्षेत्र से ली गई मृदाएं मिलाई जा सकती है। इस कार्य से माइकोराइजा प्रविष्ट हो जाता है जो लीची की वृध्दि में सहायता करता है।
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