परागण
लीची अत्यधिक पर-परागित फसल है। अलग-अलग पुष्प स्वबंध्य होता है, परन्तु इसमें पराग होता है। पुष्प के परागण के लिए मधुमक्खी, मक्खी एवं बर्र जैसे कीटों की आवश्यकता होती है।
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लीची के पुष्प में मधुमक्खी द्वारा परागकण
लीची में परागण मुख्यत: मधुमक्खी द्वारा किया जाता है। पुष्पन के समय पर लीची के बाग़ में मधुमक्खी के डिब्बो को रखने पर 30-40 प्रतिशत तक उपज बढ़ जाती है। इसके अतिरिक्त उत्पादक शहद भी प्राप्त कर सकते हैं।
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लीची के बाग़ में मधुमक्खी पेटिकाओं की स्थापना
फलन:
पुष्प के सफल परागण होने पर पहले अंडाशय की वृध्दि होती है और फल का विकास प्रारम्भ हो जाता है। अधिकांश पुष्प या नर होते हैं या मिथ्या उभयलिंगी होते हैं। इस प्रकार मादा पुष्पों का छोटा अनुपात उत्पन्न होता है और सीमित संख्या में पुष्पों का सफल परागण एवं निषेचन होता है। सफल परागण एवं निषेचन के फलस्वरूप फल विकास प्रारम्भ हो जाता है और पुष्प गुच्छ में लगे हुए फल दिखाई देते हैं। फिर भी यह देखा गया है कि कल्टीवार वृक्ष ओज और वातावरण दशा पर निर्भर लीची में फल स्थापना 1 से 48 प्रतिशत के परिसर में होता है। बीस फल प्रति पुष्प गुच्छ होने पर अच्छी फसल उत्पन्न होती है।
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